Saturday, August 13, 2011

Arrival


गुनगुना रहे हैं भवरे....खिल रही कली कली


गली गली.....कली कली

Monday, June 13, 2011

Woke-up Man


कहाँ आंखों में आंसू बोलते हैं
मैं मेहनतकश हूँ............. मेरे बाजू बोलते हैं

Sunday, May 1, 2011

Crazy Two


दो दीवाने शहर में......रात या दोपहर में

आबोदाना ढूंढ़ते हैं......एक आशियाना ढूंढ़ते हैं

Monday, March 28, 2011

Faces


चेहरे वही हैं पहाड़ी शहर के.........हँसमुख और उदास चेहरे


वे हमें और हम उन्हें पहचानते हैं.......लेकिन जानते नहीं कि


वे हम हैं...........................या हम वे हैं

Friday, March 4, 2011

Pot’s Poetry

सूरज की गर्मी से .... तपते हुए तन को
मिल जाये .... तरुवर की छाया

Sunday, February 20, 2011

My Waves

ओ मांझी रे..........
अपना किनारा ......नदिया की धारा है

Monday, February 7, 2011

Back To Home

कहीं दूर जब दिन ढल जाये
साँझ की दुलहन बदन चुराए... चुपके से आए

Friday, February 4, 2011

Someone Gone

जिंदगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मुकाम
वो फिर नहीं आते....फिर नहीं आते

Monday, January 31, 2011

God’s Foot

मुझे तोड़ लेना बनमाली , उस पथ पर देना तुम फ़ेंक
मातृभूमि हित शीश नावाने, जिस पथ जावें वीर अनेक