Friday, March 4, 2011

Pot’s Poetry

सूरज की गर्मी से .... तपते हुए तन को
मिल जाये .... तरुवर की छाया

16 comments:

  1. वाउउउउउउउउउउउउउ, यही शब्द आज निकला अपकी ये नयी पोस्ट देख कर। बेहतरीन काम। अब आप पूरी तरह से कैमरा उठा ही लो।

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  2. मिट्टी की मीठी छाया
    धूप सत्‍य है सुमित
    कथन समझें अमिट

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  3. जीवन के सफ़र और भावनाओं का एक अनुपम भारतीय दृष्टिकोण ।

    A unique perspective coming from the Bhartiya space, landscape and tradition - Simply magical.. awesome perspective in all your creations !

    The putting together of the images with the philosophical Hindi songs is what I found so unique... keep going you are doing great :)

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  4. सुमित!
    मुझे तुम्हारे खींचे हुए इस फोटोग्राफ को देखकर अपने दोस्त कवि शहंशाह आलम की पंक्तियां याद आ रही है-
    जब तक एक भी कुम्हार है
    इस पूरी धरती पर
    और मिट्टी आकार ले रही है
    समझो कि मंगलकामनाएं की जा रही हैं।

    मेरी शुभकामनाएं लो...एक दिन तुम बहुत बड़े फोटोग्राफर बनोगे (उम्र से नहीं, अपने काम से)

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  5. thank you very much Dev sir, sucheta ji and avinash ji

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  6. Awesome photography Sumeet. I am glad to learn that you are so talented. Keep it up. Be sure to send me updates when you post new photos on this blog.

    love,
    Shuchi (bhabhi)

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  7. bahut khoobsoorat...
    Ye kavya hai ya kuch chamatkar jo meri aankhon ne padha,
    ise kumhar ki chal ne nahi aapke camrre ne hai gadha.

    sadhuvaad

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  8. gopaljeepradhan@gmail.comMarch 11, 2011 at 12:43 PM

    जोरदार यार सुमित

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  9. If I had not visited ur blog then I would have really missed these spectacular snaps! Phenomenal work!!!!! Simply awesome! Keep it up! :-)

    -Divya Gairola

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  10. रंग-पर्व होली आपको सपरिवार शुभ हो ....

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  11. बहुत सुंदर... होली की शुभकामनायें .....हैप्पी होली

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  12. ▬● सुमित , चित्र यूनीक है.......
    बस चमक कम करने पर ध्यान देना चाहिए था ताकि घडों पर पड़ रही रौशनी के रिफ्लेक्शन को कम किया जा सकता और उन पर की डिजाईन की लाईन्ज़ क्लियर हो पातीं.......

    (मेरी लेखनी, मेरे विचार..)
    (अनुवादक पन्ना)

    समय मिले तो मेरे ब्लॉग तक का फेरा भी लगा आना दोस्त...

    .

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