Friday, December 16, 2011

Sand’s Sunglasses


बेरहम तंत्र…मेरे सामने जो नोट फेंक जाता है


उसमें से बाहर निकलकर आता है…एक बूढ़ा क्रांतिकारी


झुककर देता है मुझे मेरा चश्मा
और कहता है………


`सत्यमेव जयते को फिर से पढ़ो और नया कुछ गढ़ो´


12 comments:

  1. gud job sumit..............
    GOD BLESS U ..............KP ON DONG

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  2. GOOD JOB Sir, कृपया हमें भी सिखा दें... ये सब आप कैसे करते हैं...?

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  3. निदा फाजली की पंक्तियां हैं-
    मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा
    जाते हैं जिधर सब मैं उधर क्यों नहीं जाता।
    मैं देख रहा हूं, एक रास्ता बन रहा है। बधाई!

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  4. I would need Ur help to craft my comment for this pic coz no word from my vocabulary would do justice to it. The pic is beyond imagination & my comment is beyond explanation. --Divya

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  5. ▬● सुमित , तुम्हारे क्लिक्स मुझे शुरू ही से पसंद हैं जब से मैंने इन्हें देखा था.......

    Su-j Helth (Acupressure-Health)
    http://www.web-acu.com/

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  6. lalak ki jhalak ret pr bkhoobi dikh rhi h, ahsas ke jajbat man se nikal kr falak pr thm gye h ...behad umda....nayab cheez ...........

    Gyan tripathi

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